वित्तीय गलियारों में उस समय सनसनी फैल गई जब वित्त मंत्रालय ने बड़े कॉर्पोरेट्स और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर UPI और डेबिट कार्ड लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू करने के नए दिशानिर्देशों पर काम शुरू किया। हालांकि सरकार ने साफ किया है कि आम नागरिकों और छोटे दुकानदारों के लिए यूपीआई हमेशा की तरह पूरी तरह मुफ्त रहेगा।
50 करोड़ रुपये से अधिक के वार्षिक टर्नओवर वाले बड़े व्यापारियों और ऑनलाइन दिग्गजों (जैसे Amazon, Flipkart) पर नाममात्र MDR शुल्क लगाने की तैयारी से फिनटेक कंपनियों और बैंकों के शेयर उछल गए हैं। Paytm की पेरेंट कंपनी One97 Communications के शेयरों में 10% से अधिक की तेजी दर्ज की गई है।
बैंकिंग क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल भुगतान ढांचे को लंबे समय तक टिकाऊ बनाए रखने के लिए बुनियादी लागत का निकलना जरूरी था। अब तक सरकार फिनटेक कंपनियों को सब्सिडी देकर प्रोत्साहित कर रही थी, लेकिन नए कदम से फिनटेक कंपनियों का रेवेन्यू मॉडल मजबूत होगा।
दूसरी ओर, बड़े व्यापारी संगठनों ने इस कदम पर अपनी चिंता व्यक्त की है। उनका तर्क है कि मर्चेंट शुल्क लगाने से डिजिटल लेनदेन की रफ्तार धीमी हो सकती है और कुछ कंपनियां इस अतिरिक्त लागत का बोझ अप्रत्यक्ष रूप से उपभोक्ताओं पर डाल सकती हैं।
वित्तीय तकनीक के क्षेत्र में भारत का यह नया प्रयोग दुनिया भर के अर्थशास्त्रियों का ध्यान खींच रहा है। यदि यह मॉडल सफल रहता है, तो भारत डिजिटल भुगतान सुरक्षा और कमर्शियल मोनेटाइजेशन का नया वैश्विक बेंचमार्क स्थापित करेगा।