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कांदा एक्सप्रेस से राहत: दिल्ली-NCR में ₹35/किलो प्याज की आपूर्ति शुरू, नकेल में कीमतें

महंगाई की मार झेल रही आम जनता और खासकर दिल्ली-NCR के मध्यम वर्ग की रसोई का बजट सुधारने के लिए केंद्र सरकार ने एक अनोखा और बड़ा कदम

कल्ट करंट डेस्क
कल्ट करंट डेस्क
26 Aug 2026

महंगाई की मार झेल रही आम जनता और खासकर दिल्ली-NCR के मध्यम वर्ग की रसोई का बजट सुधारने के लिए केंद्र सरकार ने एक अनोखा और बड़ा कदम उठाया है। देश के कई हिस्सों में प्याज की कीमतों में आए अचानक उछाल को थामने के लिए उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने रेलवे के जरिए नासिक से बफर स्टॉक का प्याज बड़े पैमाने पर भेजना शुरू कर दिया है। इस विशेष मालगाड़ी को 'कांदा एक्सप्रेस' नाम दिया गया है, जिसके जरिए महाराष्ट्र के नासिक से प्याज की बड़ी खेप दिल्ली-NCR और अन्य प्रमुख खपत केंद्रों तक पहुंचाई जा रही है।



इस पूरी पहल का प्राथमिक उद्देश्य थोक और खुदरा दोनों ही बाजारों में आपूर्ति बढ़ाकर आसमान छूते दामों पर अंकुश लगाना है। सरकार अपने रणनीतिक बफर स्टॉक से NCCF (राष्ट्रीय सहकारी उपभोक्ता महासंघ) और NAFED (नेफेड) के बिक्री केंद्रों, मोबाइल वैनों तथा मदर डेयरी के सफल आउटलेट्स के माध्यम से मात्र ₹35 प्रति किलोग्राम की रियायती दर पर प्याज आम जनता को उपलब्ध करा रही है। पिछले कुछ हफ्तों में कई प्रमुख शहरों में प्याज की कीमतें ₹50 से ₹65 प्रति किलो तक पहुंच गई थीं, जिससे आम नागरिक बेहाल थे।



लॉजिस्टिक्स और लागत के लिहाज से 'कांदा एक्सप्रेस' का संचालन बेहद प्रभावी माना जा रहा है। आमतौर पर सड़कों के जरिए ट्रकों से प्याज लाने में समय अधिक लगता है, परिवहन लागत ज्यादा आती है और बर्बादी (वेस्टेज) की संभावना भी बनी रहती है। इसके विपरीत, रेलवे के एक फुल रैक (मालगाड़ी) से एक ही बार में लगभग 1,600 से 2,200 टन से भी अधिक प्याज सुरक्षित और तेजी से पहुंचाया जा सकता है। इससे परिवहन लागत में सीधी बचत होती है, जिससे उपभोक्ताओं तक ₹35/किलो की सस्ती दर पर प्याज पहुंचाना व्यावहारिक संभव हो पाता है।



त्योहारी सीजन के करीब आते ही बाजार में जमाखोरी, मुनाफाखोरी और सट्टेबाजी का अंदेशा बढ़ जाता है, जिससे कई बार कृत्रिम किल्लत पैदा कर दी जाती है। ऐसे समय में सरकार द्वारा सीधे बफर स्टॉक को बाजार में उंडेलना सट्टेबाजों और जमाखोरों के नेटवर्क पर एक करारा प्रहार है। जब बाजार में ₹35 प्रति किलो का सस्ता विकल्प प्रचुर मात्रा में उपलब्ध होगा, तो खुदरा और थोक व्यापारी मनमाने दाम पर प्याज बेचने में असमर्थ हो जाएंगे, जिससे स्वतः ही खुले बाजार में भी कीमतें नीचे आ जाएंगी।



समग्र विश्लेषण करें तो 'कांदा एक्सप्रेस' केवल एक मालगाड़ी नहीं, बल्कि भारतीय आपूर्ति श्रृंखला और खाद्य मूल्य स्थिरता (Food Price Stabilization) के प्रबंधन की एक व्यावहारिक मिसाल है। हर साल मानसून और त्योहारी मांग के कारण प्याज और हरी सब्जियों की कीमतों में अस्थिरता देखी जाती है। इस तरह के अग्रिम और आक्रामक हस्तक्षेपों से जहां एक तरफ आम उपभोक्ता की जेब पर पड़ने वाले बोझ में राहत मिलती है, वहीं दूसरी तरफ यह साबित होता है कि सुव्यवस्थित लॉजिस्टिक्स और बफर स्टॉक का सही समय पर इस्तेमाल करके खाद्य महंगाई को प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सकता है।