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सिंधु जल समझौते पर भारत का सख्त रुख: जल-कूटनीति का नया दौर

भारत ने दशकों पुरानी सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) के मौजूदा प्रावधानों में संशोधन और समीक्षा को लेकर पाकिस्तान

कल्ट करंट डेस्क
कल्ट करंट डेस्क
02 Sep 2026
Solar farm during sunset

भारत ने दशकों पुरानी सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) के मौजूदा प्रावधानों में संशोधन और समीक्षा को लेकर पाकिस्तान के खिलाफ बेहद सख्त और आक्रामक रुख अपना लिया है। भारत ने स्पष्ट संदेश दिया है कि जब तक सीमा पार से प्रायोजित गतिविधियों पर विराम नहीं लगता, तब तक जल-बंटवारे के पुराने समझौतों पर यथास्थिति कायम नहीं रखी जा सकती।



पाकिस्तान इस पूरे मामले को लेकर अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय और वैश्विक मंचों पर गुहार लगा रहा है, लेकिन भारत का साफ मानना है कि 1960 में हुई यह संधि अब बदलती भू-राजनीतिक, तकनीकी और जनसांख्यिकीय परिस्थितियों के अनुकूल नहीं रह गई है।



रणनीतिक विश्लेषण के अनुसार, भारत का यह कदम उसकी 'जल-कूटनीति' (Water Diplomacy) में आए बड़े बदलाव को दर्शाता है। भारत अब पानी को केवल एक प्राकृतिक संसाधन न मानकर, राष्ट्रीय सुरक्षा और कूटनीतिक सौदेबाजी के एक प्रभावी हथियार के रूप में प्रयोग कर रहा है।  



पाकिस्तान के दृष्टिकोण से यह स्थिति अत्यंत चिंताजनक है, क्योंकि उसकी पूरी कृषि व्यवस्था और अर्थव्यवस्था सिंधु नदी प्रणाली के पानी पर निर्भर है। भारत द्वारा पश्चिमी नदियों (सिंधु, झेलम, चिनाब) पर नए रन-ऑफ-द-रिवर हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट्स का निर्माण करने से पाकिस्तान के जल-सुरक्षा समीकरण बिगड़ सकते हैं।



इस घटनाक्रम से निष्कर्ष निकलता है कि दक्षिण एशिया में अब द्विपक्षीय संबंधों के नियम पूरी तरह बदल रहे हैं। भारत अब पुराने ऐतिहासिक समझौतों के दबाव में रहने के बजाय अपने राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देने की रणनीति पर स्पष्टता के साथ आगे बढ़ रहा है।