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ताइवान जलडमरूमध्य में रेड अलर्ट: क्या अब शुरू होगा 21वीं सदी का सबसे बड़ा संकट?

ताइवान द्वीप को चारों तरफ से घेरकर चीनी जनमुक्ति सेना (PLA) द्वारा शुरू किए गए अब तक के सबसे बड़े और आक्रामक सैन्य युद्धाभ्यास ने वैश्विक सुरक्षा ढाँचे की नींव हिलाकर रख दी है। सैकड़ों चीनी लड़ाकू विमानों, बमवर्षकों और नौसैनिक युद्धपोतों ने ताइवान की मध्य रेखा (Median Line) को पार करते हुए द्वीप की पूर्ण नौसैनिक और हवाई नाकेबंदी का छद्म अभ्यास किया है।

कल्ट करंट डेस्क
कल्ट करंट डेस्क
29 Sep 2026
Solar farm during sunset

ताइवान द्वीप को चारों तरफ से घेरकर चीनी जनमुक्ति सेना (PLA) द्वारा शुरू किए गए अब तक के सबसे बड़े और आक्रामक सैन्य युद्धाभ्यास ने वैश्विक सुरक्षा ढाँचे की नींव हिलाकर रख दी है। सैकड़ों चीनी लड़ाकू विमानों, बमवर्षकों और नौसैनिक युद्धपोतों ने ताइवान की मध्य रेखा (Median Line) को पार करते हुए द्वीप की पूर्ण नौसैनिक और हवाई नाकेबंदी का छद्म अभ्यास किया है। बीजिंग के रक्षा मंत्रालय ने बयान जारी कर इसे 'ताइवान की अलगाववादी ताकतों' और पश्चिमी देशों की दखलअंदाजी के खिलाफ एक अंतिम और सख्त चेतावनी करार दिया है।

ताइवान पर चीन के इस संभावित सैन्य हमले की खबर ने दुनिया भर के वित्तीय और शेयर बाजारों में तबाही मचा दी है। ताइवान केवल एक भौगोलिक द्वीप नहीं है, बल्कि वह वैश्विक तकनीकी ढाँचे का मुकुट है। दुनिया के 60 प्रतिशत से अधिक सेमीकंडक्टर और 90 प्रतिशत से अधिक अत्याधुनिक माइक्रोचिप्स का निर्माण ताइवान की 'TSMC' जैसी दिग्गज कंपनियां ही करती हैं। ताइवान पर सैन्य कब्जे का मतलब है दुनिया भर के स्मार्टफोन, कंप्यूटर, एआई-सर्वर, ऑटोमोबाइल और रक्षा प्रणालियों का उत्पादन रातों-रात ठप्प हो जाना।

अमेरिकी राष्ट्रपति और यूरोपीय संघ के नेताओं ने सर्वसम्मति से घोषणा की है कि ताइवान की यथास्थिति को बलपूर्वक बदलने की किसी भी कोशिश के खिलाफ चीन पर अब तक के सबसे भीषण आर्थिक और सैन्य प्रतिबंध लगाए जाएंगे। हालाँकि, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कई बार दोहराया है कि ताइवान का चीन में पुनर्मिलन एक ऐतिहासिक अनिवार्यता है, जिसे हासिल करने के लिए सैन्य ताकत का इस्तेमाल करने से भी परहेज नहीं किया जाएगा। इस रुख ने दुनिया को तीसरे विश्वयुद्ध की कगार पर लाकर खड़ा कर दिया है।

भारतीय परिप्रेक्ष्य में, ताइवान जलडमरूमध्य का यह संकट भारत के आर्थिक और तकनीकी भविष्य पर बहुत गहरा और विनाशकारी असर डाल सकता है। यदि ताइवान से सेमीकंडक्टर की आपूर्ति रुकती है, तो भारत के तेजी से उभरते इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर, ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की रफ्तार पूरी तरह थम जाएगी। इसके अलावा, वैश्विक व्यापार मार्गों के ठप्प होने से भारतीय अर्थव्यवस्था को अरबों डॉलर का सीधा नुकसान उठाना पड़ सकता है।

हालाँकि, इस रणनीतिक संकट ने भारत के लिए अपने स्वदेशी सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को रातों-रात मजबूत करने की तात्कालिकता को भी रेखांकित किया है। 'इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन' के तहत गुजरात और अन्य राज्यों में स्थापित किए जा रहे नए सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन प्लांट्स (Fabs) को जल्द से जल्द चालू करना अब राष्ट्रीय सुरक्षा का प्राथमिक एजेंडा बन गया है। भारत ताइवान की प्रमुख चिप निर्माण कंपनियों को भारत में अपनी इकाइयां स्थापित करने के लिए बड़े प्रोत्साहन और सुरक्षा दे रहा है।

कूटनीतिक मोर्चे पर, भारत 'वन चाइना पॉलिसी' की पुरानी शब्दावली का आँख मूंदकर पालन करने के बजाय ताइवान के साथ अपने आर्थिक, सांस्कृतिक और तकनीकी संबंधों को लगातार प्रगाढ़ कर रहा है। यदि चीन ताइवान पर कोई सैन्य दुस्साहस करता है, तो भारत अपनी उत्तरी सीमाओं (LAC) पर चीनी सेना की गतिविधियों पर कड़ी नज़र रखते हुए पश्चिमी देशों के साथ रणनीतिक तालमेल मजबूत करेगा। भारत का यह दृष्टिकोण यह स्पष्ट करता है कि वह चीनी आक्रामकता का मुकाबला करने के लिए अपनी बहुध्रुवीय विदेश नीति का पूरा लाभ उठाने को तैयार है।

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