वाशिंगटन ने अंतरराष्ट्रीय आपराधिक अदालत (ICC) पर कड़े और ऐतिहासिक प्रतिबंध लगाने की घोषणा कर दी है। अमेरिकी विदेश मंत्री ने दो टूक शब्दों में कहा है कि जब तक यह अदालत अमरीकी नागरिकों के खिलाफ अपने मामलों को पूरी तरह बंद नहीं करती, तब तक अमरीका इसे "ईंट से ईंट बजाकर" तहस-नहस कर देगा। इस कदम से पश्चिमी देशों और वैश्विक न्यायिक संस्थाओं के बीच घमासान छिड़ गया है।
अमरीकी प्रशासन का आरोप है कि यह वैश्विक कोर्ट राजनीतिक रूप से प्रेरित होकर अमरीका और उसके प्रमुख सहयोगियों को निशाना बना रहा है। इस तीखे टकराव के बाद मानवाधिकार संगठनों और यूरोपीय देशों में गहरी चिंता छा गई है। विश्लेषकों का मानना है कि इस कदम से अंतरराष्ट्रीय कानूनों और संधियों को लागू कराने वाली वैश्विक व्यवस्था बेहद कमजोर हो जाएगी।
रूस और चीन जैसे देशों ने इस मौके का फायदा उठाते हुए अमरीका पर दोहरे मापदंड अपनाने का खुला आरोप लगाया है। उनका कहना है कि अमरीका अपनी सुविधा के अनुसार अंतरराष्ट्रीय कानूनों का इस्तेमाल करता है और विरोध में आने पर संस्थाओं को कुचलने का प्रयास करता है। इस बयानबाजी से वैश्विक कूटनीति में तनाव और अधिक गहरा गया है।
अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों का कहना है कि इस संस्था के कमजोर होने से दुनिया भर के तानाशाही और विद्रोही गुटों के हौसले बुलंद होंगे। युद्ध अपराधों और मानवाधिकारों के हनन मामलों में न्याय की आस लगाए बैठे पीड़ितों के लिए यह एक बड़ा झटका साबित हो सकता है। वैश्विक स्तर पर न्याय प्रणाली का भविष्य अब भारी खतरे में नजर आ रहा है।
भारत के लिए यह भू-राजनीतिक घटनाक्रम बेहद संवेदनशील और सतर्क रहने वाला है। भारत न तो रोम संविधि का हस्ताक्षरकर्ता है और न ही इस अदालत का सदस्य है, लेकिन वैश्विक पटल पर अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की विश्वसनीयता पर उठते सवाल नई दिल्ली के कूटनीतिक समीकरणों को प्रभावित करते हैं। भारत हमेशा से सार्वभौमिक संप्रभुता का समर्थन करता रहा है।
अमरीका और इस प्रमुख वैश्विक अदालत के बीच चल रही यह खींचतान बहुपक्षीय कूटनीति के लिए एक बड़ी परीक्षा बन चुकी है। भारत जैसे विकासशील देशों के लिए यह जरूरी है कि वे वैश्विक मंचों पर संतुलन बनाए रखें ताकि महाशक्तियों के आपसी टकराव से वैश्विक आर्थिक और कानूनी सुरक्षा पर कोई प्रतिकूल असर न पड़े।
#USSanctions #ICC #GlobalJustice #InternationalLaw #Geopolitics #USForeignPolicy #WorldCourt #DiplomaticCrisis