पाकिस्तान में राजनीतिक गतिरोध और खूनी संघर्ष अपने चरम पर पहुंच गया है। पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) ने शाहबाज शरीफ सरकार द्वारा प्रांतीय सरकार को निलंबित किए जाने के फैसले को "संवैधानिक तख्तापलट" (Coup) करार दिया है। इमरान खान की जेल से रिहाई की मांग को लेकर सड़कों पर उतरे हजारों प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच भीषण झड़पें हो रही हैं, जिससे देश गृहयुद्ध की कगार पर पहुंच गया है।
इस्लामाबाद और रावलपिंडी की ओर मार्च कर रहे पीटीआई समर्थकों पर सेना और पुलिस ने बड़े पैमाने पर कार्रवाई की है। हजारों की संख्या में राजनीतिक कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर जेलों में ठूंस दिया गया है। प्रांतीय स्वायत्तता को कुचलने के इस सरकारी कदम से खैबर पख्तूनख्वा और पंजाब प्रांतों में भारी असंतोष फैल गया है। विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तानी सेना एक बार फिर पर्दे के पीछे से देश की सत्ता पर पूरी तरह हावी होने की कोशिश कर रही है।
पाकिस्तान की ध्वस्त होती अर्थव्यवस्था ने इस राजनीतिक आग में घी डालने का काम किया है। महंगाई दर आसमान छू रही है, विदेशी मुद्रा भंडार खत्म होने की कगार पर है और आईएमएफ (IMF) की शर्तों ने आम जनता का जीना दूभर कर दिया है। राजनीतिक अस्थिरता के कारण अंतरराष्ट्रीय निवेशकों ने पाकिस्तान से मुंह मोड़ लिया है। देश में बढ़ते आंतरिक असंतोष का फायदा उठाकर तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) जैसे आतंकवादी संगठन भी सुरक्षा बलों पर अपने हमले तेज कर चुके हैं।
पाकिस्तानी सेना प्रमुख और शहबाज सरकार जन-आक्रोश को दबाने के लिए क्रूर तरीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं। विपक्ष का आरोप है कि लोकतंत्र का मुखौटा पूरी तरह उतर चुका है और देश में अघोषित मार्शल लॉ लागू है। मानवाधिकार संगठनों ने इस्लामाबाद में जारी इस बर्बर कार्रवाई पर गहरी चिंता व्यक्त की है। अगर इमरान खान के समर्थकों का यह आंदोलन और उग्र होता है, तो पाकिस्तान ताश के पत्तों की तरह ढह सकता है।
पाकिस्तान में उठने वाला कोई भी राजनीतिक या सैन्य तूफान भारत की सीमा सुरक्षा पर सीधा असर डालता है। एक अस्थिर और परमाणु हथियारों से लैस पाकिस्तान भारत के लिए हमेशा एक बड़ा सुरक्षा जोखिम होता है। जब भी पाकिस्तान में आंतरिक संकट गहराता है, वहां की सेना और आईएसआई (ISI) जनध्यान भटकाने के लिए भारत विरोधी गतिविधियों या जम्मू-कश्मीर सीमा पर सीजफायर उल्लंघन का सहारा लेती हैं।
भारत की सेनाएं (BSF और भारतीय थल सेना) नियंत्रण रेखा (LoC) और अंतरराष्ट्रीय सीमा पर हाई अलर्ट पर हैं। पाकिस्तान के आर्थिक और राजनीतिक रूप से कमजोर होने से उसके द्वारा समर्थित आतंकवाद की कमर भले टूट रही हो, लेकिन उसके बिखराव से पनपने वाली अराजकता भारत में घुसपैठ के खतरे को बढ़ा सकती है। नई दिल्ली इस पूरे तख्तापलट और राजनीतिक अस्थिरता पर कड़ी निगरानी रख रही है।
#PakistanCrisis #ImranKhanPTI #PakistanCoup #CivilWarRisk #PakArmy #SouthAsiaGeopolitics #IndiaBorderSecurity #IslamabadProtest