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रियाद एयरपोर्ट पर हूती हमला

रियाद के किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर यमन के हूती विद्रोहियों ने एक बार फिर बैलिस्टिक मिसाइल से भीषण हमला किया है। मिसाइल को एयर डिफेंस द्वारा इंटरसेप्ट किए जाने के बावजूद इसके मलबे से हवाई अड्डे के परिसर और आसपास की इमारतों को भारी नुकसान पहुंचा है।

कल्ट करंट डेस्क
कल्ट करंट डेस्क
13 Oct 2026

रियाद के किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर यमन के हूती विद्रोहियों ने एक बार फिर बैलिस्टिक मिसाइल से भीषण हमला किया है। मिसाइल को एयर डिफेंस द्वारा इंटरसेप्ट किए जाने के बावजूद इसके मलबे से हवाई अड्डे के परिसर और आसपास की इमारतों को भारी नुकसान पहुंचा है। इस अचानक हुए हमले में मौतों और घायलों की खबर से पूरे मध्य पूर्व में सुरक्षा को लेकर नए सिरे से हड़कंप मच गया है।

​सऊदी अरब ने इस घटना के बाद अपनी वायुसेना को हाई अलर्ट पर रखते हुए कड़ी जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है। रियाद में नागरिक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा प्रोटोकॉल कड़े कर दिए गए हैं। पश्चिम एशिया में जारी यह सीधा सैन्य टकराव पूरे क्षेत्र को एक और विनाशकारी क्षेत्रीय युद्ध के मुहाने पर धकेल रहा है।

​उधर, अमेरिकी प्रशासन इस संघर्ष के राजनीतिक और आर्थिक नतीजों को लेकर असमंजस में दिखता है। राष्ट्रपति ट्रंप ने आगामी मध्यावधि चुनावों और महंगाई के दबाव को देखते हुए क्षेत्र में सैन्य तनाव कम करने की बात कही है, जबकि सहयोगी देशों की सुरक्षा पर सवाल बने हुए हैं। तेहरान और उसके समर्थित गुटों का रुख इस मामले में और आक्रामक होता दिख रहा है।

​दूसरी ओर, रूस भी इस संकट के बीच मॉस्को के कूटनीतिक प्रभाव को बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रहा है। पश्चिमी प्रतिबंधों के बीच रूस की सक्रियता ने अमेरिका और उसके मित्र देशों के लिए नई कूटनीतिक चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। ऊर्जा सुरक्षा को लेकर दुनिया भर के प्रमुख देश अब खाड़ी के इस नए घटनाक्रम पर बारीक नजर बनाए हुए हैं।

​भारत के लिए खाड़ी क्षेत्र का यह संकट बेहद सीधा और संवेदनशील प्रभाव रखता है। सऊदी अरब और पड़ोसी देशों में लाखों भारतीय प्रवासी काम करते हैं, जिनकी सुरक्षा और प्रेषित धन (Remittances) भारत की अर्थव्यवस्था का प्रमुख स्तंभ हैं। उड़ानों में व्यवधान और युद्ध के खतरे से प्रवासियों की सुरक्षा पर चिंताएं गहरा गई हैं।

​इसके अतिरिक्त, रियाद पर हमले और लाल सागर में जहाजों पर खतरे से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से उछल सकती हैं। भारत अपनी ईंधन जरूरतों के लिए मध्य पूर्व पर काफी हद तक निर्भर है। यदि यह गतिरोध लंबा खींचता है, तो भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम और आयात बिल बढ़ने से अर्थव्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव बन सकता है।

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