पाकिस्तान ने पूर्वी अफ्रीका के रणनीतिक देश सोमालिया को अपने उन्नत JF-17 थंडर फाइटर जेट बेचने की एक बहुत बड़ी रक्षा डील को अंतिम रूप दे दिया है। इस गोपनीय सौदे के सामने आते ही अफ्रीका के हॉर्न (Horn of Africa) क्षेत्र में नई शक्ति-संतुलन की जंग छिड़ गई है।
इस्लामाबाद का यह कदम अदन की खाड़ी और लाल सागर के पास अपनी सैन्य और नौसैनिक उपस्थिति का विस्तार करने की एक बड़ी साजिश के रूप में देखा जा रहा है। सोमालिया में पाकिस्तानी लड़ाकू विमानों की तैनाती से इस क्षेत्र में पहले से मौजूद पश्चिमी शक्तियों में भारी खलबली मच गई है।
सुरक्षा विश्लेषकों का दावा है कि इस रक्षा सौदे के पीछे विदेशी फंडिंग काम कर रही है, जो अफ्रीका में प्रभाव बढ़ाने की होड़ में लगे देशों का खेल है। पाकिस्तान की इस नई आक्रामक नीति से पड़ोसी अफ्रीकी देशों में भी डर का माहौल बन गया है।
लाल सागर का यह इलाका दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री व्यापारिक मार्गों में से एक है। वहां किसी भी अप्रत्याशित सैन्य और हवाई ताकत की मौजूदगी से अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर गंभीर संकट खड़ा हो सकता है।
भारतीय परिप्रेक्ष्य: पश्चिमी हिंद महासागर और अफ्रीका का हॉर्न भारत के समुद्री सुरक्षा क्षेत्र (Maritime Security Zone) के बेहद करीब है। वहां पाकिस्तान का रक्षा नेटवर्क बढ़ना भारत की नौसैनिक सुरक्षा के लिए एक सीधी चुनौती है।
भारतीय नौसेना पहले से ही इस क्षेत्र में समुद्री डाकुओं और सुरक्षा खतरों से निपटने के लिए गश्त करती रही है। नई दिल्ली अब सेशेल्स, मॉरीशस और मित्र अफ्रीकी देशों के साथ मिलकर अपने रक्षा साझेदारी नेटवर्क को और मजबूत करने की रणनीति पर तेजी से काम कर रही है।
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