दक्षिण चीन सागर के विवादित स्प्रैटली द्वीप समूह के पास चीन और फिलीपींस के नौसैनिक जहाजों के बीच अब तक की सबसे हिंसक और खतरनाक टक्कर देखने को मिली है। चीनी कोस्ट गार्ड के बड़े जहाजों ने फिलीपींस के आपूर्ति पोत पर पानी की शक्तिशाली बौछारें करने के साथ-साथ उसे सीधी टक्कर मार दी, जिससे फिलीपींस का जहाज गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गया।
इस घटना के तुरंत बाद मनीला में भारी जन आक्रोश फैल गया है। फिलीपींस के राष्ट्रपति ने चीनी राजदूत को समन भेजकर कड़ा विरोध दर्ज कराया है और स्पष्ट किया है कि फिलीपींस अपनी समुद्री संप्रभुता से पीछे नहीं हटेगा। फिलीपींस ने इस मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय न्यायाधिकरण जाने की घोषणा की है।
दूसरी ओर, वाशिंगटन ने बीजिंग के इस आक्रामक कदम की कड़ी निंदा करते हुए फिलीपींस के साथ अपनी परस्पर रक्षा संधि (Mutual Defense Treaty) का हवाला दिया है। अमेरिकी नौसेना के युद्धपोत तुरंत फिलीपींस के जहाजों की मदद और सुरक्षा के लिए विवादित क्षेत्र की ओर रवाना कर दिए गए हैं, जिससे इस जलक्षेत्र में अमेरिकी और चीनी नौसेनाएं आमने-सामने आ गई हैं।
यह जलमार्ग दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री मार्गों में से एक है, जहां से हर साल ट्रिलियन डॉलर का वैश्विक व्यापार गुजरता है। इस क्षेत्र में बढ़ता सैन्य तनाव पूरी दुनिया के व्यापार और जहाजरानी उद्योग के लिए एक बड़ा खतरा बनता जा रहा है।
भारतीय परिप्रेक्ष्य: दक्षिण चीन सागर भारत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्ग है। भारत का लगभग 55% से अधिक समुद्री व्यापार इसी क्षेत्र से होकर गुजरता है। भारत इस क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय कानूनों के तहत 'नेविगेशन की स्वतंत्रता' (Freedom of Navigation) का लगातार समर्थन करता आया है।
भारत ने फिलीपींस के साथ हाल के वर्षों में अपने रणनीतिक और रक्षा संबंधों को काफी मजबूत किया है, जिसमें ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों का निर्यात शामिल है। दक्षिण चीन सागर में चीन का बढ़ता आक्रामक रुख भारत को क्वाड (QUAD) और दक्षिण-पूर्वी एशियाई देशों (ASEAN) के साथ अपनी नौसैनिक साझेदारी को और मजबूत करने के लिए प्रेरित करता है।
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