इथियोपिया और इरीट्रिया के बीच जारी सीमा विवाद अब संयुक्त राष्ट्र (UN) के गलियारों तक पहुँच गया है, जहाँ दोनों देशों ने एक-दूसरे पर सैन्य आक्रमण और पूर्ण युद्ध छेड़ने के आरोप लगाए हैं। इथियोपिया द्वारा लाल सागर (Red Sea) तक सीधी पहुँच माँगने के बाद से इस क्षेत्र में संघर्ष गहरा गया है।
इथियोपिया का तर्क है कि उसकी बढ़ती अर्थव्यवस्था और सुरक्षा के लिए लाल सागर तक पहुँच अत्यंत आवश्यक है, जबकि इरीट्रिया ने इसे अपनी संप्रभुता पर सीधा हमला करार दिया है। सीमाओं पर दोनों तरफ से भारी सैन्य तैनाती की खबरें आ रही हैं।
अफ्रीका के 'हॉर्न ऑफ अफ्रीका' क्षेत्र में यह नया संघर्ष पूरे अफ्रीका महाद्वीप को अस्थिर कर सकता है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने दोनों देशों से अपनी सेनाएँ पीछे हटाने और तुरंत कूटनीतिक वार्ता शुरू करने की अपील की है।
लाल सागर के ठीक मुहाने पर स्थित होने के कारण इस इलाके में किसी भी युद्ध का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों और लाल सागर के समुद्री मार्ग की सुरक्षा पर पड़ना तय है।
भारतीय परिप्रेक्ष्य: हॉर्न ऑफ अफ्रीका में शांति भारत की समुद्री सुरक्षा के लिए बेहद अहम है। पश्चिमी हिंद महासागर और लाल सागर का यह प्रवेश द्वार भारत के यूरोप और अफ्रीका के साथ होने वाले व्यापार का मुख्य रास्ता है।
भारत 'ग्लोबल साउथ' (Global South) के एक मजबूत नेता के रूप में अफ्रीका में शांति और स्थिरता का समर्थन करता है। भारत के कई आर्थिक निवेश इस क्षेत्र में लगे हुए हैं, इसलिए नई दिल्ली कूटनीतिक माध्यमों से इस तनाव को कम करने की वकालत कर रही है।
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