पृथ्वी की निचली कक्षा (LEO) में स्थापित उपग्रहों को निशाना बनाने और उनकी जासूसी करने वाली अंतरिक्ष प्रौद्योगिकियों को लेकर दुनिया की अंतरिक्ष ताकतों के बीच एक नया और अदृश्य युद्ध शुरू हो गया है। हाल ही में एक प्रमुख देश के जासूसी उपग्रह द्वारा दूसरे देश के सैन्य कम्युनिकेशन सैटेलाइट के बेहद करीब पहुँचकर उसकी गतिविधियों पर नजर रखने का सनसनीखेज मामला सामने आया है।
इस घटना के बाद अंतरिक्ष विज्ञान और रक्षा हलकों में हड़कंप मच गया है। रक्षा विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अंतरिक्ष अब केवल अनुसंधान का क्षेत्र नहीं रह गया है, बल्कि यह भविष्य के युद्धों का एक नया और सबसे संवेदनशील मोर्चा बन चुका है।
प्रमुख अंतरिक्ष एजेंसियां अपने उपग्रहों को 'एंटी-सैटेलाइट' (ASAT) हथियारों और साइबर हमलों से सुरक्षित करने के लिए विशेष सॉफ्टवेयर और डिफेंस मैकेनिज्म विकसित करने में जुट गई हैं। अंतरिक्ष में मलबे (Space Debris) का खतरा भी इस अंधाधुंध होड़ के कारण लगातार खतरनाक स्तर तक बढ़ रहा है।
अंतरराष्ट्रीय संधियों के अभाव में अंतरिक्ष की इस सैन्य दौड़ को नियंत्रित करना बेहद कठिन होता जा रहा है, जिससे भविष्य में अंतरिक्ष युद्ध की आशंकाओं ने वैश्विक नेताओं की चिंता बढ़ा दी है।
भारतीय परिप्रेक्ष्य: भारत अंतरिक्ष अनुसंधान और रक्षा तकनीक के क्षेत्र में एक महाशक्ति के रूप में उभर चुका है। 'मिशन शक्ति' जैसी सफल सफलताओं के बाद भारत के पास अंतरिक्ष में अपनी संपत्तियों की रक्षा करने की पूरी क्षमता है। भारत अंतरराष्ट्रीय मंचों पर हमेशा से 'आउटर स्पेस' के शांतिपूर्ण उपयोग और अंतरिक्ष के सैनยीकरण पर रोक लगाने के लिए कड़े वैश्विक नियमों की वकालत करता रहा है, ताकि भारतीय संचार और नौवहन उपग्रहों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
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