भारतीय संसद के नए भवन और उसकी दीवारों पर उकेरी गई अमूल्य कलाकृतियों को लेकर देश के राजनीतिक और साहित्यिक गलियारों में एक नई और बेहद चर्चित पुस्तक "Tides of Time: Bharat's History through Murals in Parliament" सामने आई है। इस पुस्तक ने देश के इतिहास प्रेमियों और कला जगत का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।
इस किताब में भारतीय संसद के अंदर बने उन विशाल और भव्य भित्ति चित्रों (Murals) के इतिहास, पौराणिक कथाओं और आधुनिक भारत के निर्माण की गाथाओं का बारीकी से चित्रण किया गया है। चित्रकला और इतिहास के समन्वय पर आधारित यह कृति भारत की हजारों साल पुरानी सभ्यता और सांस्कृतिक यात्रा को एक नए दृष्टिकोण से प्रस्तुत करती है।
पुस्तक के आते ही राजनीतिक और सांस्कृतिक विश्लेषकों के बीच इस बात की चर्चा शुरू हो गई है कि कैसे प्राचीन भारतीय दर्शन और आधुनिक लोकतांत्रिक मूल्यों को कला के माध्यम से एक सूत्र में पिरोया गया है। कला समीक्षकों ने इसे भारतीय वास्तुकला और इतिहास के दस्तावेज के रूप में एक मील का पत्थर बताया है।
आम पाठकों और युवाओं के बीच भी इस किताब को लेकर भारी उत्साह देखा जा रहा है, क्योंकि यह संसद की उन दीवारों के अनकहे रहсуतों को सामने लाती है जिन्हें आम तौर पर दर्शक केवल दूर से देख पाते हैं। सोशल मीडिया पर इस पुस्तक के अंश और इसकी भव्यता की चर्चा काफी तेजी से वायरल हो रही है।
भारतीय परिप्रेक्ष्य: भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और ऐतिहासिक गौरव को नई पीढ़ी तक पहुँचाने के लिहाज से यह पुस्तक बेहद महत्वपूर्ण है। यह सिर्फ एक किताब नहीं, बल्कि हमारी सभ्यता के क्रमिक विकास का ऐसा दस्तावेज है जो हर भारतीय के भीतर राष्ट्रीय गौरव और अपनी संस्कृति के प्रति सम्मान की भावना को और प्रगाढ़ करता है।
तस्वीर:– साभार OneIndia
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