समाज / साहित्य 437 ‘काजल की मेड़’ का लोकार्पण एवं परिचर्चा: अनिला राखेचा की कविताओं ने रचा संवेदना का संसार देश की प्रतिष्ठित साहित्यिक-सांस्कृतिक संस्था नीलांबर के तत्वावधान में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम में युवा कवयित्री एवं नीलांबर की कोर समिति की सदस्या अ... कल्ट करंट डेस्क 14 Sep 2025
समाज / साहित्य 507 प्रेमचंद का साहित्य भारत के निर्माण का सपना है : शंभुनाथ भारतीय भाषा परिषद और सांस्कृतिक पुनर्निर्माण मिशन द्वारा प्रेमचंद जयंती के अवसर पर साहित्य संवाद का आयोजन किया गया। ‘प्रेमचन्द का भारत’ विषय पर बोलते... कल्ट करंट डेस्क 27 Jul 2025
समाज / साहित्य 805 Cult Current ई-पत्रिका (जनवरी, 2025 ) : अभिनय के महापुरुष से एक भावपूर्ण मुलाकात 1970 के दशक के प्रारंभ में, एक युवा दीप्ति नवल अपने घर से बहुत दूर, न्यू यॉर्क के हंटर कॉलेज में अपनी पढ़ाई कर रही थीं। एक ऐसी जगह, जहां भारतीय संस्कृ... दीप्ति नवल 31 Dec 2024
समाज / साहित्य 745 Cult Current ई-पत्रिका (जनवरी, 2025 ) : ज़ाकिर हुसैन का तबला और ब्रह्मांड की धड़कन उनका सफर मध्य दिसंबर में सैन फ्रांसिस्को में समाप्त हुआ, जहां वे एक दुर्लभ फेफड़े की बीमारी से जूझ रहे थे। लेकिन उनका धरोहर... उनका संगीत... हमेशा जीव... संदीप कुमार 31 Dec 2024
समाज / साहित्य 464 श्याम बेनेगल ने भारतीय सिनेमा को नयी भाषा दी ‘जुनून’ (1979) जैसी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि वाली फ़िल्म के तुरंत बाद श्याम बेनेगल ने 'कलयुग' (1981) में महाभारत को आधुनिक संदर्भों में रखा। फिर, ‘मंडी’ (19... कल्ट करंट डेस्क 26 Dec 2024
समाज / साहित्य 1117 ‘बस्तर बोलता भी है’ - वर्तमान दौर के प्रतिरोध का प्रतीक साहित्य की हर विधा अपने समय का प्रतिनिधित्व करती है. इसीलिए साहित्य केवल अपने शिल्प और कथ्य की वजह से ही नहीं बल्कि तथ्य की वजह से ऐतिहासिक दस्तावेज म... जलज वर्मा 28 Nov 2020
समाज / साहित्य 710 संवेदनाओं की छन्नी से छन कर निकले शब्द ‘बस्तर बोलता भी है’ यह पुस्तक डॉ. राजाराम त्रिपाठी द्वारा लिखित केवल काव्य संग्रह ही नहीं है बल्कि छत्तीसगढ़ के एक ऐसे जिले से मुलाकात है जिसके बारे मे... बृहस्पति कुमार पाण्डेय 26 Nov 2020
समाज / साहित्य 676 इस दीपक में तेल नहीं... (व्यंग्य) भारतीय राजनीति में नारों का इतिहास चुनावों से बहुत पुराना है. पार्टियों के चुनावी घोषणापत्र, उनकी नीतियां सब अपनी जगह पर होते हैं मगर चुनाव में समां ब... राहुल देव 12 Nov 2020
समाज / साहित्य 547 बेशर्म (लघुकथा) हम दो ही पैदा हुए थे, अम्मा के. <Br/>अम्मा अब नहीं है. चली गई है भगवान के पास, दूर...बहुत दूर. डॉ पूरन सिंह 06 Nov 2020