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UPI से बदले वित्तीय लेनदेन, वैसे 'स्कैन एंड शेयर' से बदलती स्वास्थ्य सेवाएं

25 करोड़ ओपीडी पंजीकरण और बदलती भारतीय स्वास्थ्य सेवा राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (NHA) की 'स्कैन एंड शेयर' (Scan & Share) सेवा द्वारा 25 करोड़ ओपीडी पंजीकरण का ऐतिहासिक आंकड़ा पार

कल्ट करेंट डेस्क
कल्ट करेंट डेस्क
08 Aug 2026
Solar farm during sunset

25 करोड़ ओपीडी पंजीकरण और बदलती भारतीय स्वास्थ्य सेवा राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (NHA) की 'स्कैन एंड शेयर' (Scan & Share) सेवा द्वारा 25 करोड़ ओपीडी पंजीकरण का ऐतिहासिक आंकड़ा पार करना केवल एक तकनीकी उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह भारत के सार्वजनिक स्वास्थ्य ढांचे में आ रहे एक मौन और व्यापक बदलाव का प्रमाण है। सरकारी और निजी अस्पतालों की लंबी कतारों, कागजी पर्चों और समय की बर्बादी से जूझते आम नागरिकों के लिए यह सेवा एक वरदान साबित हुई है। आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM) के तहत शुरू की गई इस पहल ने देश के स्वास्थ्य क्षेत्र को डिजिटल युग में मजबूती से खड़ा कर दिया है।



इस प्रणाली का तकनीकी और विश्लेषणात्मक पहलू बेहद सरल लेकिन प्रभावी है। मरीज को केवल अपने स्मार्टफोन से अस्पताल के काउंटर पर लगे क्यूआर (QR) कोड को स्कैन करना होता है, जिससे उसकी 'आभा' (ABHA - Ayushman Bharat Health Account) आईडी के ज़रिए बुनियादी जानकारी स्वतः अस्पताल के सिस्टम में ट्रांसफर हो जाती है। इसके परिणामस्वरूप, जहां पहले ओपीडी पर्ची बनवाने में घंटों का समय लगता था, वहीं अब यह काम महज कुछ सेकंडों में पूरा हो जाता है। इससे न केवल मरीजों का बहुमूल्य समय बचता है, बल्कि अस्पतालों में भीड़ प्रबंधन (Crowd Management) भी आसान हुआ है।



आंकड़ों के नजरिए से देखें तो इस सेवा का दायरा देश के 756 जिलों में फैले 30,800 से अधिक स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुंच चुका है, जिनमें 24,000 से अधिक सरकारी और लगभग 6,500 निजी अस्पताल शामिल हैं। बिहार (7.3 करोड़ से अधिक पंजीकरण), उत्तर प्रदेश और आंध्र प्रदेश जैसे राज्य इस डिजिटल सेवा का लाभ उठाने में सबसे आगे रहे हैं। यह आंकड़ा स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि डिजिटल साक्षरता और तकनीक का उपयोग केवल बड़े महानगरों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह देश के छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों तक सफलतापूर्वक गहराई से पैठ बना चुका है।



स्वास्थ्य प्रशासन के दृष्टिकोण से, यह पेपरलेस व्यवस्था केवल पंजीकरण तक सीमित नहीं है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि मरीज का स्वास्थ्य रिकॉर्ड (Prescriptions, Lab Reports) उसकी आभा (ABHA) आईडी से जुड़ जाता है। भविष्य में मरीज जब भी किसी अन्य डॉक्टर या अस्पताल में जाएगा, तो उसे अपनी पुरानी फाइलों का पुलिंदा साथ ले जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। डॉक्टर मरीज की सहमति से एक क्लिक पर उसकी पूरी मेडिकल हिस्ट्री देख सकेंगे, जिससे सही इलाज और सटीक निर्णय लेना कहीं अधिक आसान और त्वरित हो जाएगा।



 25 करोड़ का यह पड़ाव दर्शाता है कि जिस तरह 'UPI' ने भारत में वित्तीय लेन-देन का चेहरा बदला, ठीक उसी तरह 'ABDM' स्वास्थ्य सेवाओं के वितरण को सुलभ और पारदर्शी बना रहा है। डिजिटल हेल्थ इकोसिस्टम पर जनता का यह बढ़ता भरोसा भारत को एक ऐसे भविष्य की ओर ले जा रहा है जहाँ हर नागरिक के पास एक सुरक्षित, एकीकृत और परेशानी मुक्त स्वास्थ्य सेवा तक पहुँच होगी।