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दुर्लभ बीमारियों के इलाज के लिए अमूल मॉडल पर 'पेशेंट डेटा कलेक्टिव'

दवाओं के लिए अमूल मॉडल,दुर्लभ बीमारियों (Rare Diseases) के लिए नई दवाओं और उपचारों के विकास में रोगियों के मेडिकल रिकॉर्ड और डेटा की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है

कल्ट करंट डेस्क
कल्ट करंट डेस्क
26 Aug 2026
Solar farm during sunset

दुर्लभ बीमारियों (Rare Diseases) के लिए नई दवाओं और उपचारों के विकास में रोगियों के मेडिकल रिकॉर्ड और डेटा की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। चूँकि दुर्लभ बीमारियों के मरीजों की संख्या बहुत कम होती है, इसलिए पारंपरिक तरीकों से बड़े पैमाने पर क्लिनिकल ट्रायल (नैदानिक परीक्षण) करना संभव नहीं हो पाता।



इस समस्या के समाधान के लिए 'पेशेंट डेटा कलेक्टिव' (PDC) यानी रोगी डेटा सहकारी समिति बनाने का प्रस्ताव रखा गया है। यह मॉडल भारत के प्रसिद्ध 'अमूल' (Amul) डेयरी सहकारिता पर आधारित है। जिस तरह अमूल लाखों किसानों से दूध इकट्ठा कर उसका मुनाफा वापस किसानों को देता है, उसी तरह पीडीसी मरीजों के डेटा का प्रबंधन करके शोध को बढ़ावा देगा और उससे होने वाले लाभ को मरीजों के हित में इस्तेमाल करेगा।



इस डेटा कलेक्टिव में भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR), आयुष्मान भारत डिजिटल हेल्थ मिशन, अस्पतालों और मरीज अधिकार समूहों का डेटा सुरक्षित रूप से एकत्र किया जाएगा। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और जनरेटिव AI तकनीकों का उपयोग करके इस डेटा का विश्लेषण किया जाएगा, जिससे शोधकर्ताओं को नई दवाओं के परीक्षण के लिए वर्चुअल या सिंथेटिक कंट्रोल ग्रुप बनाने में मदद मिलेगी।



भारतीय आबादी की आनुवंशिक विविधता बहुत व्यापक है। देश की अनूठीEndogamous (सगोत्र/सजातीय) जनसांख्यिकी का डेटा उपलब्ध होने से वैश्विक फार्मास्युटिकल कंपनियां और दवा विकासकर्ता भारत में शोध करने के लिए आकर्षित होंगे, जिससे देश में दुर्लभ बीमारियों के इलाज की गति तेज होगी।



यह पहल पूरी तरह से मरीज- केंद्रित होनी चाहिए और इसमें डेटा सुरक्षा तथा नैतिकता के उच्चतम मानकों का पालन किया जाना चाहिए। केंद्र सरकार, आईसीएमआर और निजी स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं के सहयोग से एक सुरक्षित डिजिटल हेल्थ लॉकर और AI आधारित प्लेटफॉर्म बनाकर भारत दुर्लभ बीमारियों के इलाज के क्षेत्र में एक नई क्रांति ला सकता है।