भारत सरकार ने देश में सेमीकंडक्टर निर्माण (Chip Manufacturing) पारिस्थितिकी तंत्र को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए 1.27 लाख करोड़ रुपये की भारी-भरकम 'सेमीकॉन 2.0' (Semicon 2.0) योजना को अधिसूचित कर काम तेज कर दिया है। पहली योजना (Semicon 1.0) की सफलता के बाद, इस दूसरे चरण का उद्देश्य केवल असेंबली और टेस्टिंग तक सीमित न रहकर भारत को फैब्रिकेशन (Fab), चिप डिजाइन और संपूर्ण कच्चे माल की आपूर्ति श्रृंखला का केंद्र बनाना है।
सेमीकंडक्टर आधुनिक दुनिया का "नया तेल" हैं। स्मार्टफोन, लैपटॉप और ऑटोमोबाइल से लेकर रक्षा उपकरणों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तक, हर अत्याधुनिक तकनीक चिप्स पर ही निर्भर है। अब तक भारत चिप्स के लिए ताइवान, चीन और दक्षिण कोरिया जैसे देशों पर पूरी तरह निर्भर रहा है। इस निर्भरता को खत्म करने और राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीतियों को मजबूत करने के लिए सेमीकॉन 2.0 योजना अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
इस योजना के तहत सरकार वैश्विक और घरेलू कंपनियों को चिप डिजाइनिंग, फैब्रिकेशन प्लांट्स (Fabs) लगाने और डिस्प्ले असेंबली के लिए भारी वित्तीय प्रोत्साहन (Incentives) और सब्सिडी प्रदान कर रही है। कई वैश्विक दिग्गज कंपनियों ने भारतीय कंपनियों के साथ संयुक्त उद्यम (Joint Ventures) बनाकर गुजरात और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में अपने प्लांट लगाने शुरू कर दिए हैं। इससे भारत में हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग का एक नया दौर शुरू हो रहा है।
आर्थिक दृष्टि से इस योजना से लाखों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष उच्च-कौशल वाले (High-skilled) रोजगार पैदा होंगे। इसके अलावा, भारत में सेमीकंडक्टर बनने से घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग की लागत में बड़ी कमी आएगी, जिससे भारतीय इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पाद वैश्विक बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बनेंगे। यह कदम भारत के 1 ट्रिलियन डॉलर की डिजिटल अर्थव्यवस्था बनने के लक्ष्य को सीधा बल प्रदान करेगा।
हालांकि, इस विशाल योजना के सामने बुनियादी ढांचे से जुड़ी कुछ बड़ी चुनौतियां भी हैं। सेमीकंडक्टर फैब्स के लिए निरंतर निर्बाध बिजली आपूर्ति, अत्यधिक मात्रा में शुद्ध पानी और अत्यधिक कुशल कार्यबल (Talent Pool) की आवश्यकता होती है। सरकार और राज्यों को मिलकर इन बुनियादी जरूरतों को सुनिश्चित करना होगा ताकि यह योजना केवल कागजों तक सीमित न रहकर भारत को वास्तव में दुनिया का सिलिकॉन हब बना सके।