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गणतंत्र दिवस की परेड के लिए पश्चिम बंगाल की झांकी को केंद्र ने किया खारिज

इस साल गणतंत्र दिवस की परेड में पश्चिम बंगाल की झांकी नहीं दिखेगी. बताया जा रहा है कि झांकी को लेकर राज्य सरकार के प्रस्ताव को विशेषज्ञ समिति ने खारिज कर दिया है.

कल्ट करंट डेस्क
कल्ट करंट डेस्क
02 Jan 2020
Solar farm during sunset

इस साल गणतंत्र दिवस की परेड में पश्चिम बंगाल की झांकी नहीं दिखेगी. बताया जा रहा है कि झांकी को लेकर राज्य सरकार के प्रस्ताव को विशेषज्ञ समिति ने खारिज कर दिया है. पश्चिम बंगाल सरकार लड़कियों के लिए चलाई जाने वाली ‘कन्याश्री’ नाम की योजना को गणतंत्र दिवस परेड में दिखाना चाहती थी. इस झांकी को एक बार पहले भी खारिज किया जा चुका है. माना जा रहा है कि इसकी वजह से केंद्र और पश्चिम बंगाल सरकार के बीच नए नागिरकता कानून (सीएए) और राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (एनआरसी) के मुद्दे पर पहले से चल रही तनातनी और बढ़ सकती है.



पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी सीएए और एनआरसी के खिलाफ लगातार मुहिम चला रही हैं. उनका कहना है कि वे किसी भी सूरत में इन कानूनों को अपने राज्‍य में लागू नहीं होने देंगी. उधर, केंद्र में सत्ताधारी भाजपा का आरोप है कि ममता बनर्जी को देश से ज्यादा अपने वोट बैंक की फिक्र है.



इससे पहले भी साल 2018 में पश्चिम बंगाल की झांकी को गणतंत्र दिवस की परेड में शामिल नहीं किया गया था. वैसे 2014 में छाऊ नृत्यकला और 2016 में बाउल कलाकारों की प्रस्तुति वाली राज्य की झांकी प्रथम पुरस्कार जीत चुकी है. इस साल परेड समारोह के लिए कुल 56 झांकियों के प्रस्ताव आए थे जिनमें से राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और अलग-अलग मंत्रालयों के 22 प्रस्ताव को चुना गया है. इस बार ब्राजील के राष्ट्रपति जेयर बोल्सोनारो समारोह के मुख्य अतिथि होंगे.



गणतंत्र दिवस परेड के लिए राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों, केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों से प्रस्ताव आमंत्रित किए जाते हैं. झांकियों का चयन एक विशेष समिति करती है जिसमें कला, संस्कृति, मूर्तिकला, संगीत, वास्तुकला और नृत्यकला से संबंधित लोग शामिल होते हैं. यह समिति प्रस्तावों पर विचार कर अपनी सिफारिशों को रक्षा मंत्रालय को सौंपती है. समय संबंधी बाध्यता को देखते हुए झांकियों का चयन सीमित संख्या में ही होता है.