भारत में इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट (Infrastructure Development) का काम इस समय अभूतपूर्व गति से चल रहा है। नए एक्सप्रेसवे, डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर और हाई-स्पीड रेल प्रोजेक्ट्स देश के आर्थिक भूगोल को तेजी से बदल रहे हैं। हाल ही में उद्घाटन किए गए कई नए हाईवे कॉरिडोर ने प्रमुख शहरों के बीच यात्रा के समय को आधा कर दिया है, जिससे न केवल यात्रियों को आसानी हुई है बल्कि सामान की आवाजाही (Logistics) भी बेहद तेज और सस्ती हो गई है।
देश की पहली बुलेट ट्रेन परियोजना (मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल) और वंदे भारत एक्सप्रेस का लगातार बढ़ता नेटवर्क भारत के रेलवे क्षेत्र में क्रांति ला रहा है। आधुनिक रेलवे स्टेशनों का कायाकल्प, नए ट्रैकों का दोहरीकरण और 100% विद्युतीकरण (Electrification) जैसे कार्यों ने भारतीय रेल का चेहरा बदल दिया है। यात्रा अब केवल एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचना नहीं रही, बल्कि एक आरामदायक और विश्वस्तरीय अनुभव बन गई है।
बुनियादी ढांचे में हो रहे इस बड़े सुधार का सीधा असर देश की जीडीपी (GDP) और व्यापार पर पड़ रहा है। लॉजिस्टिक्स कॉस्ट यानी सामान की ढुलाई की लागत कम होने से भारतीय उद्योग वैश्विक बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बन रहे हैं। नए एक्सप्रेसवे के किनारे विकसित किए जा रहे 'इंडस्ट्रियल कॉरिडोर' नए विनिर्माण केंद्रों और लॉजिस्टिक्स पार्कों को जन्म दे रहे हैं, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर खुल रहे हैं।
इस ढांचागत विकास में आधुनिक तकनीक और पर्यावरण-अनुकूल तरीकों का विशेष ध्यान रखा जा रहा है। हाईवे निर्माण में रीसाइकिल्ड प्लास्टिक और फ्लाई ऐश का उपयोग किया जा रहा है, वहीं ग्रीन कॉरिडोर के तहत सड़कों के दोनों ओर लाखों पेड़ लगाए जा रहे हैं। गति शक्ति नेशनल मास्टर प्लान के जरिए विभिन्न मंत्रालयों के बीच तालमेल बिठाकर परियोजनाओं को बिना किसी देरी के पूरा किया जा रहा है।
विश्वस्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर किसी भी विकसित राष्ट्र की सबसे पहली शर्त होता है। भारत जिस रफ्तार से अपने सड़कों, रेल नेटवर्क, बंदरगाहों और हवाई अड्डों का आधुनिकीकरण कर रहा है, वह देश को 2047 तक 'विकसित भारत' बनाने के सपने को धरातल पर उतारने में सबसे बड़ी भूमिका निभाएगा।