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जातिगत चश्मे से ना देखें राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार को

आरक्षण समाप्ती अभियान को राष्ट्रीय स्तर पर लोकप्रिय बनाने वाले तथा चुनाव प्रक्रिया में नोटा की अवधारणा को सामने लाने वाले आरके भारद्वाज ने कहा है कि संवैधानिक पदो पर योग्यता वाले उम्मीदवारों का ही चयन किया जाना चाहिए.

 CC News Network
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16 Jul 2017
Solar farm during sunset

आरक्षण समाप्ती अभियान को राष्ट्रीय स्तर पर लोकप्रिय बनाने वाले तथा चुनाव प्रक्रिया में नोटा की अवधारणा को सामने लाने वाले आरके भारद्वाज ने कहा है कि संवैधानिक पदो पर योग्यता वाले उम्मीदवारों का ही चयन किया जाना चाहिए. दलित या इस तरह की अन्य राजनीतिक उद्देश्यों से प्रेरित हो कर इन पदों की गरिमा को कम नहीं किया जाना चाहिए. श्री भारद्वाज आज प्रेस को संबोधित करते हुए ये बातें कह रहे थे.



उन्होंने कहा कि छद्म अंबेडकरवादियों का विरोध किया ही जाना चाहिए, अंबेडकर ने कभी भी योग्यता को हतोत्साहित नहीं किया. वे बस ये चाहते थे कि जातिगत आधार पर जो वर्ग समाज की मुख्यधारा में पिछड़ा है उसे भी मुख्य धारा में शामिल करने के लिए विशेष अवसर आरक्षण के रूप में उपलब्ध कराया जाए, वह भी सीमित समय के लिए. लेकिन यह दुर्भाग्य है कि अंबेडकर की यह इच्छा राजनीतिक दलों के लिए वोट बैंक बनाने का आधार बन गया है, और राजनीति के केंद्र में आ गया.



उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति चुनाव में भी राजनीतिक दल दलित कार्ड खेल रहे है, जो लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं है. उन्होंने कहा कि अगर योग्यता के लिहाज से देखा जाए, तो सत्ता पक्ष के उम्मीदवार रामनाथ कोविंद के मुकाबले मीरा कुमार कहीं अधिक योग्य हैं. हालांकि दोनों पक्षों ने जाति के आधार पर दलित उम्मीदवार उतारा है. लेकिन दोनों में से वस्तुतः कोई भी दलित नहीं है. इसलिए योग्यता के आधार पर देखा जाए तो मीरा कुमार ही इस पद के लिए योग्य उम्मीदवार है और दलगत-जातिगत राजनीति से ऊपर उठ कर उन्हें ही जीताया जाना चाहिए.