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सिंधु जल विवाद: अंतरराष्ट्रीय मंच पर पाकिस्तान की गुहार

सिंधु जल संधि पर बढ़ा तनाव: भारत की सख्ती के बाद इस्लामाबाद पहुंचा संयुक्त राष्ट्र

कल्ट करंट डेस्क
कल्ट करंट डेस्क
29 Aug 2026
Solar farm during sunset

भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल समझौते (Indus Waters Treaty) को लेकर तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। भारत द्वारा समझौते के कुछ प्रावधानों और अपनी रणनीतिक प्राथमिकताओं पर सख्त रुख अपनाने के बाद पाकिस्तान में हड़कंप मच गया है। इसके विरोध में पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय मंचों का दरवाजा खटखटाते हुए वैश्विक हस्तक्षेप की मांग की है।



पाकिस्तान का दावा है कि भारत द्वारा जल संधि के पुनरावलोकन और परियोजनाओं पर अपनाया जा रहा कड़ा रुख उसके जल सुरक्षा और कृषि क्षेत्र के लिए गंभीर संकट पैदा कर सकता है। इसी आशंका के तहत इस्लामाबाद ने संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थों के सामने अपनी चिंता दर्ज कराई है और मामले में मध्यस्थता की गुहार लगाई है।



दूसरी ओर, भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि समय और परिस्थितियों के साथ समझौते की शर्तों में बदलाव जरूरी हो चुका है। भारत का रुख यह रहा है कि सीमा पार से जारी आतंकवाद और पड़ोसी देश के अड़ियल रवैये के बीच द्विपक्षीय समझौतों का एकतरफा पालन संभव नहीं है। भारत अपनी जल परियोजनाओं को नियमानुसार और राष्ट्रीय हित में आगे बढ़ा रहा है।



विशेषज्ञों का मानना है कि सिंधु जल समझौता 1960 से दोनों देशों के बीच पानी के बंटवारे का मुख्य ढांचा रहा है, लेकिन हाल के वर्षों में बढ़ते रणनीतिक तनाव ने इसे संवेदनशील बना दिया है। पाकिस्तान का अंतरराष्ट्रीय मंचों पर जाना उसकी भू-राजनीतिक लाचारी को दर्शाता है, क्योंकि विश्व समुदाय भी इस मामले को द्विपक्षीय रूप से सुलझाने की सलाह देता रहा है।



इस विवाद के आने वाले समय में और गहराने के आसार हैं, क्योंकि भारत अपनी नदियों के पानी के न्यायसंगत और संपूर्ण उपयोग के लिए नए बांधों और जलविद्युत परियोजनाओं पर काम तेज कर रहा है। पाकिस्तान की इस अपील पर वैश्विक मंचों की क्या प्रतिक्रिया होती है, इस पर दोनों देशों की कूटनीतिक नजर बनी हुई है।