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बांग्लादेश अंतरिम सरकार और भारत के बीच शेख हसीना के प्रत्यर्पन पर विवाद

बांग्लादेश में राजनीतिक तख्तापलट के बाद बनी अंतरिम सरकार ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के प्रत्यर्पन को लेकर भारत के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। ढाका में अंतरिम सरकार के प्रमुख और विदेश मंत्रालय के प्रवक्ताओं ने स्पष्ट रूप से कहा है कि शेख हसीना पर देश में मानवाधिकार उल्लंघनों

कल्ट करंट डेस्क
कल्ट करंट डेस्क
19 Sep 2026
Solar farm during sunset

बांग्लादेश में राजनीतिक तख्तापलट के बाद बनी अंतरिम सरकार ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के प्रत्यर्पन को लेकर भारत के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। ढाका में अंतरिम सरकार के प्रमुख और विदेश मंत्रालय के प्रवक्ताओं ने स्पष्ट रूप से कहा है कि शेख हसीना पर देश में मानवाधिकार उल्लंघनों, प्रदर्शनकारियों पर हिंसा और भ्रष्टाचार के कई गंभीर मामले दर्ज हैं। ऐसे में बांग्लादेश की अदालतों में उनका सामना कराने के लिए भारत सरकार को उन्हें तुरंत ढाका के हवाले कर देना चाहिए।

इस बयान के बाद भारत और बांग्लादेश के बीच वर्षों से चले आ रहे मजबूत कूटनीतिक और व्यापारिक संबंधों में भारी खटास देखने को मिल रही है। नई दिल्ली में विदेश मंत्रालय ने स्थिति पर सतर्कता बरतते हुए कहा है कि वह बांग्लादेश में सुरक्षा हालात और वहां के अल्पसंख्यकों के अधिकारों पर नजर बनाए हुए है। भारत ने हमेशा से अपने पड़ोस में स्थिरता का समर्थन किया है, लेकिन अंतरिम सरकार के इस आक्रामक रुख से दोनों देशों के बीच जारी कई द्विपक्षीय समझौते अधर में लटक गए हैं।

शेख हसीना के भारत में शरण लेने के बाद से ही बांग्लादेश की राजनीति में भारत-विरोधी भावनाएं भड़काने की कोशिशें की जा रही हैं। अंतरिम सरकार के कुछ घटकों का तर्क है कि भारत द्वारा शेख हसीना को शरण देना बांग्लादेश के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप के समान है। वे 2013 के द्विपक्षीय प्रत्यर्पन संधि का हवाला देते हुए भारत पर कानूनी दबाव बनाने की रणनीति अपना रहे हैं, हालांकि इस संधि में राजनीतिक शरणार्थियों से जुड़े अपवाद भी शामिल हैं।

भारतीय विदेश नीति विशेषज्ञों का मानना है कि शेख हसीना को बांग्लादेश वापस सौंपना भारत के लिए एक बेहद संवेदनशील और जटिल फैसला होगा। यदि भारत अपने लंबे समय के विश्वसनीय मित्र को वापस सौंपता है, तो इससे पड़ोसी देशों में भारत की साख पर बुरा असर पड़ेगा। वहीं दूसरी ओर, यदि भारत इनकार करता है, तो बांग्लादेश की वर्तमान सरकार चीन और पाकिस्तान के अधिक करीब जा सकती है, जो भारत की सीमा सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन सकता है।

फिलहाल, दोनों देशों के बीच कूटनीतिक माध्यमों से बैक-चैनल वार्ता जारी है। भारत ने साफ कर दिया है कि वह बांग्लादेशी जनता के साथ अपने ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों को महत्व देता है, लेकिन किसी भी प्रकार की अनुचित बयानबाजी या दबाव की राजनीति को स्वीकार नहीं करेगा। इस प्रत्यर्पन विवाद ने दक्षिण एशिया की क्षेत्रीय राजनीति को एक बेहद संवेदनशील और अनिश्चित मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया है।